भाई के दोस्त ने बस में-1

प्रेषिका : रुचि

हाय मेरा नाम रुचि है, मेरी उम्र 22 साल है। मैं एक बहुत सुंदर और जवान युवती हूँ, मेरा कद 5 फुट 6 इंच है और मेरा रंग बहुत साफ़ है, मेरा जिस्म बिल्कुल किसी कारीगर की तराशी हुई संगमरमर की मूर्ति की तरह है, लोग मुझे इस डर से नहीं छूते कि मेरे शरीर पर कोई दाग ना लग जाए, मेरा फिगर 36-24-36 है और मेरी चूचियाँ मस्त गोल, सुडौल और सख्त हैं, गोरे रंग की चूचियों पर गहरे भूरे रंग की डोडियाँ !

बहुत सुंदर लगती हूँ मैं ! लम्बे घने बाल, चूतड़ों तक आते हैं, जब मटक मटक कर चलती हूँ तो सबको पागल कर देती हूँ। मेरी गली के सारे लड़के मुझे पटाने की कोशिश करते रहते हैं। मेरे मम्मे लड़कों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। मेरी बड़े और गोल चूतड़ देख कर लड़कों की हालत खराब हो जाती है और वो खड़े खड़े लण्ड को हाथ में पकड़ लेते हैं। मेरे रेशमी लम्बे बालों में पता नहीं कितने लण्डों के दिल अटके पड़े हैं। मेरी पतली कमर, मेरे गुलाबी गुलाबी होंठ, लड़कों को मेरे घर के सामने खड़े रहने के लिए मजबूर कर देते हैं। सब मुझे पटाने के हथकंडे आजमाते रहते थे पर मैं किसी से नहीं पट रही थी। मैं दिल्ली के पास के एक गाँव की रहने वाली हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी और सोचा कि मुझे भी अपनी बात सबको बतानी चाहिए। इसलिए आज मैं आपको एक व्यक्तिगत अनुभव सुना रही हूँ।

बारहवीं के बाद आगे पढ़ने के लिए मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के के कॉलेज में दाखिला ले लिया और मैं लोकल बस से कॉलेज जाने लगी। वैसे तो दिल्ली की बसें लड़कियों के लिए मुसीबत भरी होती हैं, इतनी भीड़ होती है, ऊपर से भीड़ में हर मर्द आशिक बन जाता है। दिल्ली की बसों में कोई न कोई अंकल हमेशा कभी मेरे मम्मे दबा देते, तो कभी मेरे चूतड़ सहला देते, कभी कोई लड़का अपना खड़ा लण्ड मेरी चूत या गांड से सटा के दबाता। कोई कोई तो इतनी बेरहमी से चूचियाँ मरोड़ता था कि सीधे बिजली की तरह चूत में कर्रेंट लग जाता।

एक दिन मैं अपने भाई के लैपटॉप में मूवी देख रही थी तो एक फोल्डर में मुझे ब्लू फिल्म मिल गई। मैंने फ़िल्म देख कर भाई का लैपटॉप लौटा तो दिया पर पता नहीं क्यों, पर वो नज़ारा देख कर मेरी चूत में खुज़ली सी होने लगी और मुझे अपनी सांसें कुछ भारी सी लगने लगी। मैं पूरी फ़िल्म देखकर बाथरूम जाकर अपने कमरे में तो आ गई पर मुझे फ़िर नींद नहीं आई। वो दृष्य मेरी आँखों के सामने नाचने लगा। मैंने अपनी सलवार और कच्छी उतार दी और एक हाथ से अपनी चूचियाँ दबाते हुए अपने पैन को चूत में डाल कर अन्दर बाहर किया। फ़िर पैन के बज़ाए दूसरे हाथ की उंगली डाली। थोड़ी देर बाद मेरी चूत में से कुछ सफ़ेद सा निकला और मुझे पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।

सुबह मम्मी की आवाज़ 'कॉलेज़ नहीं जाना है क्या ! जल्दी उठ !' से मेरी आँख खुली, तो जल्दी से कपड़े पहन कर बाहर आई। मुझे रात की बात अभी भी याद आ रही थी, पर मैं कॉलेज़ जाने के लिए तैयार होने लगी। मैं कच्छी और ब्रा पहन कर ही नहाती हूँ पर उस समय मेरी उत्तेज़ना बढ़ गई और मैं पूरी नंगी होकर नहाई और उँगली, साबुन की सहायता से अपनी चूत का पानी निकाला।

तरोताज़ा होकर, नाश्ता कर मैं कोलेज़ के लिए घर से निकल गई। थोड़ी सी दूर सड़क से बस मिल जाती है, वहीं से मैंने बस पकड़ी जो रोज़ की तरह ठसाठस भरी थी।जैसे तैसे गेट से ऊपर चढ़ कर थोड़ा बीच में आ गई। तो वो रोज़ की कहानी चालू। आप तो जानते ही होंगे, जवान लड़की अगर भीड़ में हो तो लोग कैसे फ़ायदा उठाते हैं, और आप उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते। वही मेरे साथ होता है, मेरे पीछे से कोई मेरे चूतड़ दबाने लगा, तो एक अंकल मेरे कन्धे पर बार बार हाथ रख कर खुश होने लगे। एक महाशय सीट पर बैठे थे, भीड़ की वज़ह से मेरी साईड उनके सिर से दबी थी, जो उन्हें भी मज़ा दे रही होगी।

इतने में मेरे भाई का एक दोस्त जो बहुत दिन से मेरे पीछे पड़ा था और केवल मेरे लिए ही इस बस से आता-जाता था, अपने गाँव से बस में चढ़ा। लम्बा, तगड़ा तो खैर वो है ही, हैण्डसम भी है। पर मैं उसे ज्यादा भाव नहीं देती थी। आज़ तो वो सबको हटाता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया।

मैंने उसे देखा पर मैं कोई आपत्ति करने की स्थिति में नहीं थी। कुछ कहा तो बोला- बस में भीड़ ही इतनी है।

अब तो मेरी नाक उसकी छाती से टकरा रही थी।

मुश्किल से पाँच मिनट बीते होंगे कि अचानक ड्राईवर ने बड़े जोर से ब्रेक लगाए तो मैं करीब करीब उसके ऊपर गिर ही पड़ी। संभलने में मेरी मदद करते हुए उसने मेरे दोनों चूचियों को पूरी तरह जकड़ लिया। इतनी भीड़ थी और हम इतने करीब थे कि मेरे सीने पर उसके हाथ और मेरी चूचियों का बेदर्दी से मसलना कोई और नहीं देख सकता था। मेरे सारे शरीर में कर्रेंट दौड़ गया, अपनी चूत में मुझे अचानक तेज़ गर्मी महसूस होने लगी। इतना सुख महसूस हो रहा था कि दर्द होने के बावजूद मैंने उसे रोका नहीं।

वो फ़िर मेरे से सट कर खड़ा हो गया। बस चलने लगी। इतने में मैंने अपने चूतड़ों के बीच अपनी गाण्ड में कुछ चुभता सा दबाव महसूस किया। पहले तो मैंने इस पर खास ध्यान नहीं दिया पर मैं समझ गई कि उसका लण्ड मेरे चूतड़ों की गरमी खाकर खड़ा हो गया है और वो ही मुझे चुभ रहा है। यह सोच कर मुझे रात वाला नज़ारा फ़िर याद आ गया और मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब मैं बिल्कुल बिना हिले कपड़ों के ऊपर से ही अपनी गाण्ड का तिया-पाँचा कराने लगी।

बस फिर क्या था, उसकी समझ में आ गया कि मैं कुछ नहीं बोलूंगी। फिर तो वह और भी पास आ गया और मेरे मम्मे सहलाने लगा। मेरी चूचियाँ तन कर खड़ी हो गई थी, वह उनको मरोड़ता और सहलाता। मेरी आँखें बंद होने लगी, मैं तो स्वर्ग में थी !

इतने में उसने अपना हाथ नीचे से मेरी कुर्ती में डाल दिया। उसका हाथ मेरे नंगे बंदन पर चलता हुआ मेरे मम्मों के तरफ बढ़ने लगा।

मेरी सांस रुकने लगी, मन कर रहा था कि चीख कर अपनी कुर्ती उतार दूँ और उसके दोनों हाथ अपने नंगे सीने पर रख लूँ।

आखिर उसके हाथ मेरी नंगी चूचियों तक पहुँच ही गए। अब तो मेरी वासना बेकाबू हुए जा रही थी। फिर उसका एक हाथ मेरी नाभि के आसपास चलने लगा मेरा तो मन हो रहा था कि अब मैं नंगी होकर चुद ही जाऊँ लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी।

फिर उसने मेरी सलवार में हाथ घुसा लिया और पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत को ज़ोर ज़ोर से दबाने-मसलने लगा। फिर अपनी उंगलिओं से मेरी चूत की फांकें अलग करके उसने एक उंगली मेरी गीली चूत में घुसानी चाही, लेकिन उसको रास्ता नहीं मिला।

फिर मुझ से रहा नही गया और मेरा हाथ व उसके लंड के ऊपर चला गया और मैं उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने-सहलाने लगी।

तब उसने मेरे कान के पास आकर कहा- नेक्स्ट स्टॉप पर उतर जाना !

सोचने या संभलने का मौका मिले, इससे पहले ही मैं उनके साथ बस से उतर चुकी थी। वो मुझे अपने साथ अपने एक दोस्त के रूम पर ले गया और बोला- मेरा दोस्त 3-4 दिनों के लिए दिल्ली से बाहर गया है।

रूम में घुसते ही वो मुझसे लिपट कर जगह जगह मुझे चूमने चाटने लगा। इससे मेरी उत्तेज़ना और बढ़ गई। यह कहानी आप अन्तरवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

तो मैं बोली- पहले डोर तो बंद करो !

तो वो उठा और जल्दी से दरवाज़ा बंद करके लौट आया। में आते ही उसने मुझे चूम लिया और बाहों में ले लिया।

मैं तो ख़ुशी से पागल हो रही थी उसकी बाहों में आकर। उसने मुझे कहाँ कहाँ नहीं चूमा- होंठ पर, कान पर, हाथ पर, वक्ष पर ! फिर उसने मुझे कस के बाहों में भर लिया और मेरे होंठ चूसने लगा। फिर उसने मेरे बाल कान पर से हटाये और कानों के आस-पास चूसने लगा और उन्हें किस करता रहा।

इससे मेरे बदन में एक अजीब सी खुमारी छा गई और मैं अपना आपा खोने लगी। वो मुझे चूमता रहा और मैं बेहोश सी होने लगी। मन कर रहा था कि बस वो मुझे चूमता रहे और मैं जन्नत में चली जाऊँ।

फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे वक्ष पर रखे और उन्हें दबाया...आआह्ह्ह ऽऽ क्या स्पर्श था वो ! उसने फिर थोड़ा और जोर से दबाया और अम्म्म बस पागल सी होने लगी मैं। फिर उसने दूसरे स्तन के साथ भी यही किया और अब तो मैं बस और खोना चाहती थी।

फिर उसने मुझे पलंग पर लेटाया, मेरे ऊपर आ गया, मेरी आँखों में देखने लगा और कहा- तुम्हारी आँखें इतनी सेक्सी क्यों हो रही हैं?

मैंने कहा- बस तुम्हारे प्यार का नशा चढ़ा हुआ है !

यह सुनते ही उसने मेरे होंठ फिर चूम लिए और दोनों दूध को दबा दिया- ऊऊओह्ह्ह्हह क्या बताऊँ कि कैसा लगा ! ऐसा लगा कि हाँ, बस आजा राजा और मार दे मुझे ! मैं इसी दिन के लिए तड़प रही थी।

वो मुझे चूमता रहा- चूमता रहा और धीरे धीरे नीचे जाने लगा। मैं तो बस रंगीन दुनिया में खोई हुई थी, उसने धीरे से मेरा कुरता उठाया और पेट पर चूम लिया... हाय क्या बताऊँ कि क्या हुआ- एक करंट सा दौड़ गया पूरे बदन में 440 वोल्ट का !

फिर उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैं मना करने की स्थिति में नहीं थी, सो मैंने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो मेरा कुर्ता आराम से उतार सके।

उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खींच दिया। सलवार बिना लगाम के घोड़े की तरह झट से नीचे गिर गई। अब मैं उसके सामने केवल ब्रा और पैन्टी में रह गई थी। मुझे शर्म तो आ रही थी लेकिन उत्तेज़ना शर्म पर हावी हो गई थी। सो मैं चुपचाप तमाशा देखती रही। उसने पहले तो मेरे सीने को फ़िर नाभि को ऐसे चूसना शुरू कर दिया मानो कुछ मीठा उस पर गिरा हो और वो उसे चाट कर साफ़ कर रहा हो। मैं बुरी तरह उत्तेज़ित हो रही थी कि उसने मेरी कच्छी के ऊपर से एक उँगली मेरी चूत में घुसेड़नी शुरू कर दी। मुझे दर्द का भी अहसास हुआ पर मैं उसे मना ना कर सकी। पता नहीं मुझे क्या हो गया था लेकिन मैं बेशर्म हो कर अपनी चूचियाँ अपने आप दबाने लगी थी।

फिर उसने मुझे अपने सामने खड़ा किया और पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को चूमने लगा, मेरी जांघों को सहलाते हुए मेरी एक टांग को सोफे पर रख कर अपनी एक उंगली से मेरी पैंटी के इलास्टिक को थोड़ा सा हटाते हुए मेरी टाँगों के जोड़ को चाटने लगा। मेरी जोर की आह निकली।

थोड़ी देर वहाँ चाटने के बाद उसने मुझे घुमा कर मेरे कूल्हों को अपने सामने कर लिया और पैंटी के ऊपर से मेरे चूतड़ चूमने लगा, फिर मेरी पैंटी को थोड़ा नीचे कर के मेरी गांड को सहलाते हुए चाटने लगा। मैं अपने दोनों हाथों से अपने मम्मे दबा रही थी और सिसकार रही थी। मेरी चूत से पानी बहने लगा। कुछ देर बाद उस ने मेरी पैंटी खींच कर नीचे कर दी और मैंने उसे उतार दिया। फिर मुझे सोफे पर बिठा कर स्वयं नीचे अपने घुटनों पर बैठ गया और मेरी टाँगों को खोल कर मेरी चूत के ऊपर चूमने लगा।

फिर उसने ऊपर होकर मेरे होठों को चूमा और फिर नीचे हो कर मेरी नाभि के आस पास चाटने लगा। उसकी एक उंगली मेरी चूत को सहला रही थी और मैं जोर जोर से सिसकार रही थी। फिर उसने अपनी जीभ से मेरी चूत के ऊपर चाटना शुरू कर दिया। उसने मेरे चूतड़ों के नीचे हाथ डाल कर मेरी चूत को अपने मुँह के और पास कर लिया। उनके हाथ मेरे मम्मे दबा रहे थे और जीभ मेरी चूत के अंदर बाहर हो रही थी। सिर्फ पाँच मिनट बीते होंगे कि मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं जोर से हुंकारते हुए झड़ गई।

कहानी अन्तरवासना पर जारी रहेगी।

[email protected]

प्रकाशित : 13 अगस्त 2013

पिछला पृष्ठ