मेघा की तड़प-1

लेखिका : नेहा वर्मा

मेघा यूँ तो किशोर अवस्था को अलविदा कर चुकी थी। उसमें जवानी की नई नई रंगत चढ़ रही थी। इसमे मेघा की सहेलियों का बड़ा हाथ था। उनकी चुलबुली बातों से मेघा का दिल भी बहक उठता था। वो भी कभी कभी शाम की ठण्डी हवाओं में कहीं सपनों में गुम हो जाया करती थी। उसे लगता था कि कोई राजकुमार जैसा मनभावन युवक उसके कोमल अंगों को सहला जाये, उसे मदहोश बना जाये, उसके गुप्त अंगों से खेल जाये। आँखें बन्द करके उसी सोच में उसकी योनि भीग जाया करती थी, अपनी योनि को दबा कर वो सिसक उठती थी। यूँ तो रात को वो चैन की नींद सोती थी पर कभी कभी सपने में वो बैचेन हो उठती थी, उसे लगता था कि उसकी कोमल योनि में कोई लण्ड घुसा रहा है, उसे चोदने की कोशिश कर रहा है। पर उसे चुदाने का कोई अनुभव नहीं था सो बस वो उसे वो सुखद अनुभव नहीं हो पाता था।

दूसरों की देखा देखी वो भी कसी जीन्स और बनियाननुमा टॉप पहनने लग गई थी। वो अपने अपने सीने के छोटे छोटे उभारों को और उभार कर लड़कों को दर्शाने की कोशिश करती थी। घर पर वो सामान्यतया एक ऊंचा सा सूती टाईट पजामा और टी शर्ट पहना करती थी जिसमें उसके चूतड़ों का आकार और उसकी बीच की गहराई, क्या तो युवकों और क्या तो अधेड़ मर्दों को अनजाने में गुदगुदा जाती थी, पर मेघा अपनी इस रोज की ड्रेस में से उभरती जवानी से अनभिज्ञ थी।

मेघा के परिवार में उसके माता पिता और उसकी एक बड़ी बहन अदिति थी। अदिति की शादी उसके बीए करने के पश्चात ही हो गई थी। मेघा अभी बारहवीं कक्षा में पढ़ रही थी। अदिति तो शादी के बाद से ही एक स्कूल में टीचर लग गई थी। वो प्रातः सात बजे बस से स्कूल चली जाती थी। जीजू प्रकाश, जो एक सरकारी महकमे में नई नई नौकरी में सुपरवाईजर के पद पर लग गया था। जीजू ने शहर में ही एक सस्ता सा मकान किराये पर ले लिया था, जो कि एक पुराना घर था। घर की हालत बहुत अच्छी तो नहीं थी, जैसे पुराने मकान होते हैं वैसा ही वो भी था। खिड़कियों के टूटे फ़ूटे कांच, बाथरूम का दरवाजा टूटा हुआ, छोटा सा चौक, जहा बर्तन वगैरह धुलते थे। जीजू वहीं चौक में नहाते थे।

सीनियर सेकेन्ड्री की परीक्षा देने के बाद वो मार्च के अन्तिम सप्ताह में ही शहर में अपनी बहन के घर छुट्टियाँ बिताने आ गई थी। फिर उसे शहर में ही तो कॉलेज ज्वाईन करना था।

जब वो शहर आई तो सबसे पहले उसके जीजू प्रकाश ने अपनी साली का स्वागत किया। उसकी खिलती जवानी को गहरी नजरों से देखा। मेघा के बदले हुये तेवर उसकी निगाहों से छुप नहीं सके।

अदिति के घर के पास ही रहने वाली खुशबू मेघा की सहेली बन गई थी। दोनों की खूब बनती थी। उसकी सहेली खुशबू ने भी उसे सुखद आश्चर्य से देखा। खुशबू ने तो एक ही नजर में भांप लिया था कि मेघा पर जवानी का सरूर चढ़ा हुआ है। उसकी बहन अदिति ने मेघा के तेवर देखे और वो भी मुस्कराये बिना नहीं रह सकी। अदिति ने पनी बहन को बैठक में ही जगह दी, जहाँ एक दीवान भी लगा हुआ था, जिसे रात को वो सोने के काम में लाया करती थी।

मेघा और खुशबू साथ साथ ही रहा करती थी, दोनों के मध्य अब अश्लील बातें भी होने लगी थी। खुशबू के कहने पर अब मेघा अपने ही घर में रात को इधर उधर झांकने की कोशिश करती रहती थी। एक बार कार्यालय जाने से पहले जब प्रकाश चौक में स्नान कर रहे थे तो मेघा को जीजू की चड्डी में से लण्ड नजर आ गया। मेघा का दिल धड़क उठा। अधखुला लण्ड का सुपाड़ा गुलाबी सुर्ख, चिकना, चमकदार, मेघा की तो आँखें खुली की खुली रह गई। पहली बार उसने लण्ड देखा था। लम्बा लटका हुआ, मोटा सा ... जैसे सब कुछ मेघा के दिल में उतरता चला गया। तभी प्रकाश की तिरछी नजर मेघा पर पड़ गई। उसने जल्दी से गीली चड्डी में अपना लण्ड छुपा लिया। मेघा भी झेंप सी गई। प्रकाश मन ही मन मुस्करा उठा। मेघा सर झुकाये अपने कमरे में चली आई और गुमसुम सी हो गई।

प्रकाश ने स्नान करके अपनी लुंगी लपेट ली और बैठक में आ गया। मेघा उस समय बैठक की बालकनी में खड़ी थी और सोच में डूबी हुई बाहर देख रही थी। प्रकाश ने एक बार तकदीर आजमाने का फ़ैसला कर लिया, उसके सोचा एक बार कोशिश करने में क्या हर्ज है? यदि मेघा नहीं पटी तो माफ़ी मांग लूंगा। वो अपने हाथ बालकनी की रेलिंग पर रखे बाहर देख रही थी। उसने मुड़ कर जीजू को देखा और हल्के से मुस्कराई। प्रकाश ने पास जाकर उसके हाथ को पर अपना लण्ड धीरे से उस पर दबा दिया।

मेघा को अपने हाथ पर उसके लण्ड का आभास हुआ। एक रबड़ की ट्यूब जैसी चीज उसके कोमल हाथ पर स्पर्श कर गई। मांसल लण्ड का कड़ापन जैसे उसके मन पर छप गया। मेघा ने तिरछी नजरों से जीजू को देखा और अपना हाथ न चाहते हुये भी धीरे से खींच लिया। मेघा की सांस तेज हो उठी।

"जीजू नाश्ता कर लो, आपको ऑफ़िस के लिये देर हो रही है।"

प्रकाश ने मन ही मन अपनी हिम्मत की दाद दी और मुस्कराते हुये नाश्ता करने लगा।

"जीजू, मैं खुशबू के यहाँ जा रही हूँ, दरवाजा बन्द करके चाबी गमले में रख देना।"

मेघा जल्दी से घर से बाहर निकल आई। उसका दिल बहुत तेज धड़क रहा था। मन बेचैन सा हो गया था। रह रह कर जीजू का लटकता हुआ लण्ड और फिर उसके कोमल स्पर्श ने उसके मन को उथल पुथल कर दिया था।

"अरे क्या हुआ मेघा, ध्यान किधर है तेरा?" खुशबू ने उसे हिलाते हुये कहा।

"अरे अन्दर तो चल, आज तो गजब हो गया !" मेघा हड़बड़ाहट में थी।

"हाय क्या हो गया मेरी जान को? किसी ने कुछ कर दिया क्या?"

"अरे वो... हाय राम... जीजू का लण्ड तो बहुत मोटा है, आगे कुछ लाल लाल सा भी है।" मेघा ने शर्माते हुये बताया।

खुशबू हंस दी।

"कैसे देखा, बता ना, क्या तेरे जीजू ने पैंट खोल कर लण्ड दिखा दिया तुझे?"

"चुप ना, वो नहा रहे थे तो चड्डी में से उनका लण्ड बाहर निकल आया ... ऐसे ऐसे झूल रहा था ... और हाय राम, जीजू ने मुझे लण्ड की तरफ़ देखते हुये पकड़ भी लिया था।"

"क्या बात है मेघा ! तेरे दिन तो अब बदलने वाले हैं ! फिर क्या हुआ?"

"वो... वो... बालकनी में तो उन्होंने मेरे हाथ से अपना लण्ड भिड़ा दिया..."

" हाय कैसा कैसा लग रहा था...?" खुशबू ने मेघा को धीरे से अपने गले लगा लिया। फिर एक चुम्बन उसके गालों पर ले लिया।

"मेघा, बस तू तो गई ... कल जब दीदी स्कूल चली जायेगी ना तो वो फिर से अपना लण्ड तेरे हाथ में दे देगा ... पर देख इस बार तू भागना नहीं ... पकड़ लेना, फिर सब भगवान भली ही करेंगे।"

"ओह, मेरी खुशबू ... सच में ... वो मुझे चोद देंगे...?"

खुशबू ने मेघा का इस बार होठों का चुम्बन ले लिया। मेघा ने भी प्रतिउत्तर में अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। दोनो बेसुध सी एक दूसरे को चूमती रही चूसती रही। खुशबू एक कदम आगे बढते हुये उसके छोटे छोटे स्तन सहलाने लगी।

"उफ़ ! यह क्या कर रही है खुशबू ? बहुत गुदगुदी लग रही है !"

"बस तुझे ऐसा ही मजा आयेगा जब जीजू ये सब करेंगे। उन्हें मना नहीं कर देना, बस मजे लेना...!"

मेघा ने भी अब हिम्मत करते हुये खुशबू के स्तन भींच लिये। खुशबू के स्तन थोड़े भारी थे।"

"हाय रे मेघा ! धीरे से ... ओह्ह ... कितना मजा आ रहा है।" खुशबू चहक उठी।

खुशबू ने अपने हाथ अब मेघा की पीठ से नीचे सरकाते हुये उसके सुडौल चूतड़ों पर रख दिए और हौले हौले उसे दबाने लगी। बीच बीच में उसकी अंगुलियाँ उसके चूतड़ों की दरार में अन्दर भी उतर जाती और उसके छेद को गुदगुदा देती।

"उह्ह्ह्ह ... ये सब मत कर, अजीब सा लगता है !"

"जब जीजू का लण्ड यहाँ घुसेगा ना ... तब क्या होगा री तेरा ? बता ना ..."

"चल बेशरम, अच्छा बता तो और कहाँ-कहाँ लण्ड घुसेड़ेगा वो जीजू... अरी बता ना ... क्या सच में ऐसा जीजू ऐसा करेंगे?"

खुशबू ने जोश में आते हुये मेघा की चूत दबा दी, जो उसके तंग पजामे में गीली हो चुकी थी। मेघा चिहुंक उठी।

"उई मां ! यह क्या करती है?"

"अरे पगली यही तो चुदती है, लण्ड इसे ही तो चोदता है ... चल यहाँ बिस्तर पर लेट जा... सब कुछ बताती हूँ, तब चुदने में भी मजा आयेगा।"

मेघा को भी मजा आने लगा था। उसने बस अब तक बातें ही की थी। उसकी आँखों में एक नशा सा उतर आया था। खुशबू की आँखें भी गुलाबी हो उठी। मेघा उसके बिस्तर पर लेट गई।

"अरे ये कपड़े तो उतार...!"

"चल हट ... ऐसे तो नंगी हो जाऊँगी !"

"तो फिर तेरे जीजू तुझे चोदेंगे कैसे? नंगी तो तुझे होना ही पड़ेगा। अन्दर यह जो चूत है ना, उसी में तो जीजू का लण्ड घुसेगा। अच्छा देख, पहले मैं कपड़े उतारती हूँ !"

खुशबू ने अपनी जीन्स उतार दी फिर चड्डी भी नीचे सरका दी। फिर टॉप ऊपर खींच कर उतार दिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

"अरे, तू तो बड़ी बेशरम है रे...!"

"अब तू भी बेशरम हो जा। चल जल्दी कर ...!"

मेघा ने सकुचाते हुये अपने कपड़े भी उतार दिये। अब दोनो नंगी एक दूसरे को निहार रही थी।

"ऐसे मत देख ना खुशबू, मुझे शरम आ रही है !"

"अब अपने पांव चौड़े करके अपनी चूत खोल दे...!"

"क्या ? पागल तो नहीं हो गई है रे तू ...?"

"तो फिर चुदेगी कैसे...? लण्ड कैसे घुसेगा तेरी चूत में...?"

"हाय राम ! क्या ऐसे भी करना पड़ेगा...?"

उसने शरमाते हुये अपनी टांगें चौड़ा दी, उसकी लाल सुर्ख चूत की दरार खुल गई। खुशबू ने धीरे से झुक कर उसकी चूत की महक ली। फिर अपनी लपलपाती हुई जीभ से उसकी गीली चूत का सारा रस समेट लिया। मेघा के बदन में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। मेघा का चूत का दाना थोड़ा सा बड़ा था जिसे एक बार चाटने से मेघा अन्दर तक झनझना गई।

"खुशबू ... हाय रे ... क्या कर रही है ? मैं मर जाऊंगी !"

फिर खुशबू ने उसकी चूत बहुत देर तक चाटी। मेघा मारे आनन्द के बेदम हो गई। बस तड़पती रह गई।

तब खुशबू ने अपनी टांगें चौड़ी की और मेघा की एक टांग के मध्य में अपनी एक टांग डाल दी, उसकी चूत से अपनी चूत टकरा दी और जोर से दबा कर रगड़ मार दी। दोनों ने जोर से सिसकी भरी। अब मेघा भी अपनी चूत को उसकी चूत से रगड़ रही थी। एक दूसरी की चूचियों को दबा दबा कर मसल रही थी। तभी खुशबू जो अधिक जोश में थी ... आह भरते हुये जोर जोर चोदने जैसे हिलने लगी फिर एकाएक वो झड़ने लगी। इसी दौरान मेघा ने भी अपनी चूत को जोर से खुशबू की चूत से दबाया और चीख सी उठी।

"हाय मर गई राम जी ... ओह्ह्ह ... खुशबू ... उफ़्फ़्फ़ ..."

मेघा ने पहली बार किसी के आगोश में सुखद झड़ने का अनुभव महसूस किया। दोनों अपनी उखड़ी सांसों को काबू में करने लगी, बेदम सी चित्त लेट गई। गहरी गहरी सांसों से अपने आप को संयत करने लगी।

"चल अब अपने कपड़े पहन ले ... कैसा लगा?"

"खुशबू, ऐसे पहले क्यों नहीं किया ... हाय राम, कितना मजा आता है।"

"मैं डरती थी कि कहीं तू बुरा ना मान जाये ... पर जब तूने अपने जीजू के बारे में बताया तो फिर मैं खुल गई।"

"क्या सच में जीजू मुझे नंगी करके चोदेंगे और लण्ड इधर ही घुसायेंगे?"

"देख और समझ ले, जीजू कहीं भी लण्ड डाले, चाहे तेरे मुँह मे, चाहे तेरी गाण्ड में, चाहे तो चूत में या फिर लण्ड से तेरे मम्मे रगड़े ... तू तो मस्ती लेते रहना ... देख शरमाना मत ... जिसने की शरम, उसके फ़ूटे करम ... समझ ले अच्छे से।"

"उफ़्फ़ खुशबू, मैं तो मर जाऊँगी...!"

खुशबू हंस दी।

कहानी जारी रहेगी।

प्रकाशित: गुरुवार 19 जुलाई 2012 6:49 am

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